बुधवार, ८ सप्टेंबर, २०२१

श्लोक

 श्लोक 

 १. तदारभ्य पुरी रम्या नाम्ना शङ्खावलीति सा |

अतीव पावना जाता विष्णुपादाम्बुसेवनात्  |

तदारभ्य मुने क्षेत्रं पवित्रं लोकविश्रुतम्  |

पदं भगवतो रम्यं वैकुण्ठस्याप्यनुत्तमम्  |

मुने किं बहुनोक्तेन मुक्तिक्षेत्रमिदं परम्  |

मुक्तिपुर्यास्तु या प्रोक्तास्ताभ्योप्यनवमा हि सा ||

  भावार्थ - अयोध्या-मथुरा आदी सप्त मोक्षपुरी प्रमाणेच शंखावली हीही आठवी मोक्षपुरी असून नववी मात्र झाली नाही .