श्लोक
१. तदारभ्य पुरी रम्या नाम्ना शङ्खावलीति सा |
अतीव पावना जाता विष्णुपादाम्बुसेवनात् |
तदारभ्य मुने क्षेत्रं पवित्रं लोकविश्रुतम् |
पदं भगवतो रम्यं वैकुण्ठस्याप्यनुत्तमम् |
मुने किं बहुनोक्तेन मुक्तिक्षेत्रमिदं परम् |
मुक्तिपुर्यास्तु या प्रोक्तास्ताभ्योप्यनवमा हि सा ||
भावार्थ - अयोध्या-मथुरा आदी सप्त मोक्षपुरी प्रमाणेच शंखावली हीही आठवी मोक्षपुरी असून नववी मात्र झाली नाही .